बिहार एवं पश्चिमी विक्षोभ
पश्चिमी विक्षोभ की उत्पत्ति, मार्ग, बिहार पर प्रभाव, महावट, कोहरा एवं रबी फसल — Bihar Govt. Competitive Exams के लिए सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री
परिचय एवं परीक्षा में महत्व
बिहार की जलवायु को समझने में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि बिहार की शीतकालीन वर्षा, शीतलहर, कोहरे और रबी कृषि का मूल नियामक है। Bihar Govt. Competitive Exams में इस विषय से प्रश्न पूछे जाते हैं।
बिहार भारत के उत्तर-पूर्वी गंगा मैदान में स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह मानसून काल में बंगाल की खाड़ी से नमी ग्रहण करता है और शीतकाल में पश्चिमी विक्षोभ के अप्रत्यक्ष प्रभाव में आता है। हिमालय की तराई से सटे होने के कारण पश्चिमी विक्षोभ जब हिमालय में हिमपात कराता है, तो उसका शीतल प्रभाव सीधे बिहार की जलवायु को प्रभावित करता है।
परिभाषा एवं वैज्ञानिक स्वरूप
पश्चिमी विक्षोभ एक एक्स्ट्राट्रॉपिकल चक्रवात (Extratropical Cyclone) है जो भूमध्यसागरीय एवं निकटवर्ती क्षेत्रों में उत्पन्न होता है और पश्चिमी जेट स्ट्रीम के सहारे पूर्व की ओर गति करते हुए भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी भागों तक पहुँचता है।
उष्णकटिबंधीय चक्रवात एवं पश्चिमी विक्षोभ में अंतर
| आधार | उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclone) | पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) |
|---|---|---|
| उद्गम क्षेत्र | उष्णकटिबंधीय महासागर (बंगाल की खाड़ी, अरब सागर) | भूमध्य सागर, कैस्पियन सागर, अटलांटिक |
| प्रकार | Tropical Cyclone | Extratropical Cyclone |
| गति की दिशा | पश्चिम से पूर्व (अनियमित) | पश्चिम से पूर्व (Westerlies के साथ) |
| मौसम | मानसून / मानसून के बाद | शीतकाल (नवम्बर–मार्च) |
| भारत में प्रभाव | तटीय क्षेत्र — ओडिशा, आंध्र, तमिलनाडु | उत्तर भारत का मैदान — J&K, Punjab, Bihar |
| ऊर्जा स्रोत | समुद्री ऊष्मा एवं लेटेंट हीट | तापमान प्रवणता (Baroclinic Instability) |
| बिहार पर प्रभाव | बंगाल की खाड़ी से चक्रवात — अक्टूबर में | महावट वर्षा, शीतलहर, कोहरा |
पश्चिमी जेट स्ट्रीम — वाहक तंत्र
पश्चिमी जेट स्ट्रीम (Subtropical Westerly Jet Stream) क्षोभमण्डल (Troposphere) की ऊपरी परतों (9–13 km ऊँचाई) में पश्चिम से पूर्व दिशा में बहने वाली तीव्र वायुधारा है। शीतकाल में यह हिमालय के दक्षिण में स्थित होती है — लगभग 25°N–30°N अक्षांश पर। पश्चिमी विक्षोभ इसी जेट स्ट्रीम के सहारे एक ट्रफ (Trough) के रूप में पूर्व की ओर बढ़ता है।
उत्पत्ति, मार्ग एवं गति
पश्चिमी विक्षोभ की यात्रा भूमध्य सागर से बिहार तक — लगभग 5,000–6,000 किलोमीटर — की होती है। इस पूरी यात्रा को समझना परीक्षा में उत्तर लिखने के लिए आवश्यक है।
चरणबद्ध मार्ग
पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता को प्रभावित करने वाले कारक
जो विक्षोभ भूमध्य सागर से अधिक नमी लेकर आते हैं वे अधिक वर्षा कराते हैं। अरब सागर से अतिरिक्त नमी ग्रहण करने पर तीव्रता और बढ़ती है।
जेट स्ट्रीम जितनी तीव्र होगी, विक्षोभ उतना ही तेज़ी से आगे बढ़ेगा और उतना कम समय बिहार को प्रभावित करेगा। कमज़ोर जेट स्ट्रीम में विक्षोभ धीरे चलता है — अधिक वर्षा।
हिमालय पश्चिमी विक्षोभ की नमी का अधिकांश भाग रोक लेता है। इसीलिए J&K में भारी हिमपात होता है और बिहार में केवल हल्की महावट वर्षा।
बिहार में स्थानीय तापमान जितना कम होगा, पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव उतना ही तीव्र महसूस होगा — विशेषकर शीतलहर के रूप में।
बिहार पर पश्चिमी विक्षोभ के प्रत्यक्ष प्रभाव
बिहार पर पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव अन्य उत्तर-पश्चिमी राज्यों की तुलना में अप्रत्यक्ष एवं कमज़ोर होता है — किन्तु इसके परिणाम — महावट, शीतलहर, कोहरा — अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। बिहार की कृषि, स्वास्थ्य और परिवहन सभी पर इसका असर पड़ता है।
प्रभाव का वर्गीकरण
पश्चिमी विक्षोभ के गुज़रने के बाद बिहार में 25–75 mm वर्षा होती है जिसे महावट कहते हैं। यह मुख्यतः दिसम्बर से फरवरी के बीच होती है। कुल वार्षिक वर्षा का केवल 2–5% ही महावट से प्राप्त होता है, किन्तु इसका कृषि महत्व असाधारण है। रबी फसलें — गेहूँ, जौ, सरसों, मसूर, चना — इसी वर्षा पर निर्भर करती हैं।
- समय: दिसम्बर–फरवरी, मुख्यतः रात एवं प्रातः काल।
- मात्रा: 25–75 mm प्रति विक्षोभ (पश्चिमी बिहार में अधिक, पूर्वी में कम)।
- क्षेत्र: पश्चिमी बिहार (रोहतास, कैमूर, भोजपुर) में सर्वाधिक, पूर्वी बिहार में कम।
- फसल लाभ: गेहूँ के लिए “सोने की बूँदें (Golden Drops)”।
जब पश्चिमी विक्षोभ हिमालय — विशेषकर जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश — में भारी हिमपात कराता है, तो उसके 2–4 दिन बाद बिहार में शीतलहर की तीव्रता अचानक बढ़ जाती है। कारण यह है कि हिमाच्छादित हिमालय और तराई क्षेत्र का तापमान बहुत नीचे गिर जाता है और वहाँ से ठंडी हवाएँ दक्षिण की ओर मैदानों में उतरती हैं।
इस प्रकार पश्चिमी विक्षोभ और शीतलहर में एक अप्रत्यक्ष किन्तु स्पष्ट संबंध है — “हिमपात → ठंडी हवाएँ → बिहार में शीतलहर”।
पश्चिमी विक्षोभ के बाद बिहार में वायुमण्डलीय नमी (Atmospheric Moisture) बढ़ जाती है। जब यह नमी रात में ठंडी भूमि के सम्पर्क में आती है, तो संघनन (Condensation) होता है और घना कोहरा बनता है। इस कोहरे में सापेक्ष आर्द्रता 90–100% तक पहुँच जाती है।
- प्रकार: मुख्यतः Advection Fog — गर्म आर्द्र हवा ठंडी भूमि पर।
- अवधि: कभी-कभी लगातार 3–5 दिन।
- प्रभाव: Cold Day की स्थिति, सूर्यप्रकाश का अभाव, तापमान और गिरना।
पश्चिमी विक्षोभ के आगमन से पहले बिहार का मौसम अपेक्षाकृत गर्म और शुष्क रहता है। जैसे ही विक्षोभ पास आता है, बादल छाने लगते हैं, नमी बढ़ती है और तापमान गिरने लगता है। विक्षोभ के जाने के बाद जब आकाश साफ होता है, तब Radiation Cooling के कारण तापमान अचानक और तेज़ी से गिरता है। यही वह समय होता है जब शीतलहर का प्रकोप सर्वाधिक होता है।
महावट एवं बिहार की रबी कृषि
महावट (Mahawat) — शीतकाल में पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली छोटी किन्तु अत्यंत लाभदायक वर्षा — बिहार की रबी कृषि की जीवनरेखा है। इसे “गोल्डन ड्रॉप्स” (Golden Drops) भी कहा जाता है।
महावट और रबी फसलों का संबंध
| रबी फसल | बुआई का समय | महावट की भूमिका | बिहार में उत्पादन क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| गेहूँ (Wheat) | नवम्बर | सर्वाधिक लाभदायक — टिलरिंग और ग्रेन फिलिंग में सहायक | पश्चिमी एवं मध्य बिहार |
| जौ (Barley) | नवम्बर | अनाज पकने में सहायक | रोहतास, भोजपुर |
| सरसों (Mustard) | अक्टूबर | फूल आने की अवस्था में लाभदायक | पश्चिम एवं उत्तर बिहार |
| मसूर (Lentil) | नवम्बर | नमी बनाए रखने में सहायक | पूर्वी एवं मध्य बिहार |
| चना (Chickpea) | अक्टूबर–नवम्बर | अत्यधिक वर्षा हानिकारक — मध्यम महावट उचित | दक्षिणी बिहार (गया, औरंगाबाद) |
| मटर (Pea) | अक्टूबर | फलन अवस्था में सहायक | उत्तरी एवं मध्य बिहार |
महावट कब हानिकारक हो जाती है?
- अत्यधिक वर्षा: 75 mm से अधिक — खेतों में जलभराव, फसल सड़ना।
- ओला वृष्टि (Hailstorm): कभी-कभी पश्चिमी विक्षोभ के साथ ओले पड़ते हैं जो गेहूँ और सरसों को नष्ट करते हैं।
- पाला: महावट के बाद साफ आकाश में Radiation Cooling से पाला पड़ सकता है।
- असामयिक वर्षा: फरवरी-मार्च में देर से महावट गेहूँ की फसल पकने में बाधा डालती है।
- महावट का अर्थ: शीतकाल में पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली वर्षा।
- सर्वाधिक महावट: पश्चिमी बिहार — रोहतास, कैमूर, भोजपुर।
- न्यूनतम महावट: पूर्वी बिहार — किशनगंज, पूर्णिया (विक्षोभ कमज़ोर हो जाता है)।
- वार्षिक वर्षा में हिस्सा: कुल वर्षा का केवल 2–5%।
- कृषि महत्व: रबी उत्पादन में सिंचाई की लागत घटती है।
कोहरा, पाला एवं शीतलहर से सम्बन्ध
पश्चिमी विक्षोभ का बिहार पर त्रिकोणीय प्रभाव है — महावट + कोहरा + शीतलहर। ये तीनों एक-दूसरे से जुड़े हैं और एक चक्र (Cycle) के रूप में काम करते हैं।
पश्चिमी विक्षोभ → कोहरा → शीत दिवस का चक्र
कोहरे के प्रकार एवं पश्चिमी विक्षोभ से सम्बन्ध
जिलावार प्रभाव एवं त्वरित संदर्भ सारणी
बिहार के सभी जिलों पर पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव एक समान नहीं होता। पश्चिमी जिलों में महावट अधिक होती है जबकि पूर्वी जिलों तक पहुँचते-पहुँचते विक्षोभ कमज़ोर पड़ जाता है।
| क्षेत्र | प्रमुख जिले | महावट वर्षा | शीतलहर प्रभाव | कोहरा |
|---|---|---|---|---|
| पश्चिमी बिहार | रोहतास, कैमूर, भोजपुर, बक्सर | 40–75 mm | तीव्र | मध्यम |
| उत्तर-मध्य बिहार | मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी | 30–55 mm | सर्वाधिक तीव्र | घना |
| मध्य बिहार | पटना, नालन्दा, सारण | 25–50 mm | मध्यम | मध्यम |
| दक्षिणी बिहार | गया, औरंगाबाद, नवादा | 20–45 mm | मध्यम | हल्का |
| पूर्वी बिहार | भागलपुर, मुंगेर, बाँका | 15–35 mm | कम | हल्का |
| उत्तर-पूर्वी बिहार | पूर्णिया, अररिया, किशनगंज | 10–25 mm | कम | मध्यम |
त्वरित संदर्भ — परीक्षा के लिए
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